जहां तुम साथ थे।

क्यों आहत हुई मैं,
क्यों मैं गुमसुम रही।
सह रही थी, उस दर्द को।
जहां जी रही थी मैं।
याद है मुझे जब खुशियां,
चमक रही थी, इन आंखों में।
दमक रही थी, उन ख्वाबों में।
जहां तुम साथ थे।
तुम छूट गए,
टूट गई मैं।
साथ चाहती थी तुम्हारा।
तुम्हारे दूर जाने के बाद।
लौट आओ कभी,
उन ख्वाबों में।
जहां तुम साथ थे,
जहां तुम पास थे।

Comments

16 responses to “जहां तुम साथ थे।”

  1. Deep Patel

    अद्भुत रचना।

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

  3. Priyanka Kohli

    Nice

  4. Anonymous

    बहोत बढ़िया!

  5. बहुत बढ़िया

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