सावन के इस मंच पर
कवियों का है संगम।
सुंदर सुहानी संध्या में
छोड़ें कुछ सरगम।।
दो पद हम लिखते हैं
दो पद तुम भी गाओ।
खेलें हम अन्तराक्षरी
निज कवित्त सुनाओ।
खेलें हम अन्तराक्षरी
Comments
15 responses to “खेलें हम अन्तराक्षरी”
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“सुंदर सुहानी संध्या में , छोड़ें कुछ सरगम”।वाह ,भाई जी
अनुप्रास अलंकार की सुंदर छटा बिखेरती हुई अति सुंदर रचना ।-
हार्दिक धन्यवाद बहिन
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दो पद हम लिखते हैं
दो पद तुम भी गाओ।
वाह बहुत खूब लाजवाब अभिव्यक्ति। वाह वाह शास्त्री जी।-
बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर पंक्तियाँ
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धन्यवाद
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अतीव अतीव सुंदर
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, शास्त्री सर
आपके व्यक्तित्व का और आपकी लेखनी का कोई तोड़ नहीं-
बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Bhot achhi poem h
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