उन लम्हों को।
जब याद करती हूं,
उन लम्हों को।
एक टीस सी उठती है।
यह आंखें नम हो जाती है।
अगर तुम साथ होते।
जिंदगी खुशियों से भर जाती,
हम उदास हैं,
यह गम नहीं।
पर यह उदासी,
अकेले सही नहीं जाती।
अगर तुम साथ होते।
जब याद करती हूं ,
उन लम्हों को।
एक टीस सी उठती है।
क्यों गए दूर मुझसे,
यह बात समझ नहीं आती।
गलती क्या थी मेरी?
जो मैं बता पाती।
क्यों आए एक बार हंसाने को,
जिंदगी भर की ये बिखरी यादें,
अकेले सही नहीं जाती।
बहुत सुंदर कविता
धन्यवाद सर
Bahut sundar
धन्यवाद
बहुत खूब
बहुत बहुत आभार सर
Very good
Thank you
Good
Thanks
👍👌
🙏
Nice
बढ़िया! 👍 बहोत खूब लिखी है!
बहुत बहुत आभार
Thank you
Very nice
धन्यवाद जी