उन लम्हों को।

जब याद करती हूं,
उन लम्हों को।
एक टीस सी उठती है।
यह आंखें नम हो जाती है।
अगर तुम साथ होते।
जिंदगी खुशियों से भर जाती,
हम उदास हैं,
यह गम नहीं।
पर यह उदासी,
अकेले सही नहीं जाती।
अगर तुम साथ होते।
जब याद करती हूं ,
उन लम्हों को।
एक टीस सी उठती है।
क्यों गए दूर मुझसे,
यह बात समझ नहीं आती।
गलती क्या थी मेरी?
जो मैं बता पाती।
क्यों आए एक बार हंसाने को,
जिंदगी भर की ये बिखरी यादें,
अकेले सही नहीं जाती।

Comments

18 responses to “उन लम्हों को।”

  1. Deep Patel

    Bahut sundar

    1. प्रतिमा

      धन्यवाद

    1. प्रतिमा

      बहुत बहुत आभार सर

  2. Anonymous

    👍👌

  3. akash choudhary

    Nice

  4. Anonymous

    बढ़िया! 👍 बहोत खूब लिखी है!

  5. प्रतिमा

    बहुत बहुत आभार

  6. प्रतिमा

    Thank you

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