6 Comments

  1. कवि प्रज्ञा जी द्वारा श्रृंगार से भरपूर लाजवाब अभिव्यक्ति।
    बहुत खूब, रूमानियत अतिसुन्दर चित्रण।

  2. वाह ,कवि प्रज्ञा जी ने बहुत सुन्दर चित्रण किया है,और भाभी को बुद्धू बनाने की कला तो क्या ख़ूब है वाह वाह ।आखिर किसी को बुद्धू बनाने के लिए बुद्धि तो होनी ही चाहिए ना ।
    सुंदर शिल्प और बेहद शानदार प्रस्तुति ।

  3. हमेशा की तरह बहुत ही खूबसूरत कविता और शिल्प कवि की कलात्मकता और बुद्धि परखता को दर्शाती है
    भावनाओं का जो गुबार आपकी कविताओं में मिलता है प्रज्ञा जी वह और कहीं नहीं मिल पाता जिस प्रकार आप भावना में गोते लगाकर कविताएं लिखते हैं और मैं एक अलग ही एहसास होता है आशा है आप ऐसी ही कविताएं लिखकर सावन परिवार को सजाती रहेंगी

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