चांद की छटा

निहार रहे थे,
चांद की छटा को हम,
बीच में ये बादल का टुकड़ा
कहां से आ गया..

*****✍️गीता

Comments

12 responses to “चांद की छटा”

  1. वाह वाह कमाल है

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Piyush ji for your valuable compliment .

  2. बहुत ही सुंदर औऱ लाजवाब अभिव्यक्ति, कवि गीता जी ने दो पंक्तियों में प्रभावशाली बात लिख दी। गागर में सागर भरना इसी को कहा जाता है। वाह वाह, लेखनी की इस प्रखरता को अभिवादन

    1. Geeta kumari

      इतनी अच्छी और प्रेरक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी । आपकी इस बहुमूल्य टिप्पणी ने बहुत उत्साह वर्धन किया है सर . बहुत बहुत आभार ।अभिवादन सर 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you kamla ji. I’m very much grateful to you

  3. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद मास्टर जी 🙏

  4. 🙂🤔👍👍✍👌

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Rishi Ji.

  5. बहुत ही उम्दा गीता जी

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