धर्मु झांझी (गढवाली हास्य)

कोराना से बल सबुकी हालत पस्त हुयीं च
देश की अर्थब्यवस्था की भी हालत खस्त हुईं च
रोजी रोटी कु जुगाड़ ह्वो न हो पर,
दरोल्यों की एसूं दों बल फ्वां फ्वां हुयीं च
सरकिर की भल मनसा ह्वो न ह्वो पर एक बात त
100% च कि
धर्मुं झांझी बल देश की अर्थब्यवस्था की नींव बण्यूं च।।

Comments

4 responses to “धर्मु झांझी (गढवाली हास्य)”

  1. हा हा हा, बहुत ही सुंदर

  2. बहुत ही सुन्दर

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