8 Comments

  1. वाह, ऋषि जी आपने तो पूरे इलाहाबाद के दर्शन ही करवा दिए अपनी कविता के माध्यम से ।गरीब बच्चों का दर्द भी दिखाई दिया ।
    अति भाव पूर्ण रचना और बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

  2. अपना प्रयाग कहेंगे कब से।।
    श्वेत श्याम धाराओं का संगम
    निर्मल गंगा पावन यमुना
    सरस्वती भी गाये सरगम
    अक्षयवट शोभित है तब से
    जटा बनाए राम जी जब से
    अपना प्रयाग कहेंगे कब से।।

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