आँसुओं की परवाह

रो रहा था वो भी
रो रहे थे हम भी..
लेकिन ना उसे हमारे आँसुओं की परवाह थी
और ना हमें उसके जाने की..

Comments

7 responses to “आँसुओं की परवाह”

  1. Rishi Kumar

    बहुत बहुत बहुत ही सुंदर
    ना जाने क्यों यह पंक्तियां पढ़कर मुझे बेचैनी हो रही है

    1. जब किसी बात को हम खुद से जोड़कर पढ़ते हैं तो ऐसा ही होता है

      1. सत्य वचन

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