10 Comments

  1. रात रूपहली रजत छिड़कते,
    झिलमिल तारों संग
    आ गए चंद्र-किशोर
    देख ऐसी छटा अम्बर पर,
    इन पंक्तियों में आपने सारा साहित्य उडे़ल दिया है भाव प्रबल हैं एवं शब्द चयन भी सराहनीय है.नवीनता को समेटती हुई आपकी रचना बेहद सराहनीय एवं उम्दा है

  2. बहुत सुंदर गीता जी।
    यूं ही प्रकृति प्रेमी बनी रहिए
    अपनी कविता से आनंद विखेरते रहिए

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