मेरे हिस्से में अभी कुछ साँस बाकी है…

सुबह होने में अभी
कुछ रात बाकी है
सो जाने दो मुझको जरा
कुछ रात बाकी है….

मुझको टूटकर बिखरने में
लगेगा कुछ और वक्त !
क्योंकि मुझमें अभी कुछ आस बाकी है….

वो मुझसे खफा हो बैठा है
एक बात पर
सुबह उठकर कर लेंगे सुलह
अभी तो कुछ रात बाकी है….

पी ली है मैंने
नशे में झूमता सारा जहान
सुबह घर जाऊंगा
अभी कुछ रात बाकी है….

आ गया मेरा बुलावा
रुक जा ओ यमराज ! तू
जी लेने दे मुझको जरा
मेरे हिस्से में अभी कुछ साँस बाकी है…

Comments

6 responses to “मेरे हिस्से में अभी कुछ साँस बाकी है…”

  1. Geeta kumari

    वाह, बहुत ख़ूब

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