रात को ये कैसे-कैसे
ख्वाब आते हैं !
तेरे खयाल
मेरी रूह को छू जाते हैं
बिस्तर ये जाने क्यूँ
काटने को दौड़ता है !
तेरी यादों से मेरा तन-मन पिघलता है
जागती हूँ रातभर और दिल मचलता है
लोग मुझे आजकल पागल बुलाते हैं
रात को ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं !
ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं…!!!
Comments
6 responses to “ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं…!!!”
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Tq
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वियोग पक्ष की सुंदर अभिव्यक्ति
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Tq
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अतिसुंदर भाव
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Tq
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