*छठ पूजा की पौराणिक कथा*

नि:संतान थे राजा प्रियंवद,
पुत्र-प्राप्ति हेतु किया हवन
प्रशाद की खीर खाकर, रानी मालिनी ने
दिया एक पुत्र को जनम
किन्तु पुत्र जीवित ना था
राजा ले जा रहे थे
पुत्र का अंतिम संस्कार करने
राजा थे शोकाकुल ज्यादा
प्राण त्यागने को आमादा
प्रकट हुई तब एक देव-कन्या,
नाम था उनका देवसेना
बोली, पूजा-व्रत करो मेरा राजन्
होगा तुम्हें प्राप्त पुत्र-रत्न
राजा ने उनका कहा माना,
कार्तिक शुक्ल की षष्टी थी वो
आई थी छठ माता,
राजा को पुत्र मिला था
तभी से ये व्रत-त्यौहार मनाया जाता ।।

*****✍️गीता

Comments

4 responses to “*छठ पूजा की पौराणिक कथा*”

  1. पूरी कहानी आपने सुंदर शब्दों में लिखी है जिससे छठ पूजा की
    महिमा का ज्ञान होता है
    जिसके लिए आप बधाई की पात्र हैं
    सधारण भाषा एवं शालीनता के साथ अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      इस सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी
      बहुत बहुत आभार

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

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