बीते कल की नहीं कहानी तुम
चलती साँसों में बसा आज हो तुम
प्यार की, दिल्लगी की बात नहीं
इससे बढ़कर रहे हो नाज हो तुम।
अहमियत क्या बताएँ, कैसी है
तन में धड़कन है जैसी वैसी है,
यह युमन है कि तुम हमारे हो
खूब प्यारे हो, बहुत प्यारे हो।
रोशनी हो, उमंग हो तुम ही
खिलते जीवन के रंग हो तुम ही
हम हैं कल्पक व तुम प्रेरक हो,
जिन्दगी की तरी के खेवक हो।
आओ बस बैठे रहो पास में तुम
जिन्दगी रसमयी बनायें हम।
चलती साँसों में बसा आज हो तुम
Comments
10 responses to “चलती साँसों में बसा आज हो तुम”
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बहुत ही शानदार रचना, प्रेम रस परिपूर्ण
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बहुत बहुत धन्यवाद
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वाह वाह बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद
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Very nice
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Thanks
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जीवन साथी पर लिखी गई बहुत ही सुन्दर रचना
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बहुत धन्यवाद
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प्रेम के भावों से लबरेज पत्नी के लिए सुंदर कविता
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बहुत धन्यवाद
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