“कुदरत का अनमोल रत्न”

कुदरत का अनमोल रत्न
********************
कुदरत का अनमोल रत्न है ये जीवन
जब हों फूल से रिश्ते तो
महकता है जीवन
अगर हों बेनाम से रिश्ते तो
सुगंध ही दुर्गंध बन जाती है
फिर बोझिल- सा लगने लगता है जीवन
स्वार्थ की पैनी दृष्टि जब
पड़ती है रिश्तों पर
कंकड़ की तरह
चुभने लगता है जीवन
बेबुनियाद जब अविश्वास
पनप उठता है
ताश के पत्तों के माफिक
बिखर जाता है जीवन…

Comments

6 responses to ““कुदरत का अनमोल रत्न””

  1. Geeta kumari

    कविता के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों को बयां करती हुई बहुत सुंदर रचना

    1. धन्यवाद आपका सुंदर समीक्षा

  2. This comment is currently unavailable

Leave a Reply

New Report

Close