राधा-श्याम

प्रिये, यह आज तुमने कैसी चाय है बनाई
कौन सी लजीज़ वस्तु है मिलाई
घूंट-घूंट पीते अजब रूहानी मस्ती है छाई
इससे पहले तो कभी ऐसी चाय ना पिलाई।

नही जानाँ, आज बस चाय बनाते
राधा-श्याम धुन थी लगाई।

Comments

6 responses to “राधा-श्याम”

    1. Anu Singla

      Thanks g

    1. Anu Singla

      Thanks g

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

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