तुम्हारे कानों के झुमके
बहुत ही प्यारे हैं
तुमने मुस्कुरा के जब कहा
हम तुम्हारे हैं
तुम्हारी बोली मुझको भजन-सी लगी
तुम्हारी हँसी भी
फूलों से प्यारी लगी
तुमने जब कहा हम
बहुत प्यारे हैं
थोड़ी-सी हँसी आ गई मुझको
लाज के मारे
छुप गई मैं तो
तुम्हारे इशारे मुझको प्यारे हैं
चलो कह देते हैं हम भी
हम तुम्हारे हैं….
हम तुम्हारे हैं
Comments
6 responses to “हम तुम्हारे हैं”
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वाह, बहुत सुन्दर पंक्तियां
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बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी हौसलाअफजाई के लिए
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सुस्वागतम् प्रज्ञा जी
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भाव में कही गई कम शब्दों वाली कविता “हम तुम्हारे है”सफल प्रेम की प्रतीक है।
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धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव
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