सखी

ऐसी क्या बात है सखी,
क्या हो तुम मुझसे नाराज सखी
करके चुनरी का ओला सखी,
क्यूं कर दिया अबोला सखी
ना कोई संदेश ना दूरभाष सखी,
आती है तेरी बहुत याद सखी
क्या मुझसे हुई कोई भूल सखी,
तेरा अबोला दे हृदय में शूल सखी
______✍️गीता

Comments

8 responses to “सखी”

  1. बेहद सुंदर कविता

    1. धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. Praduman Amit

    दोस्ती और इश्क़ जीवन में कभी कभी इम्तहान भी लेती है।

  3. Seema Chaudhary

    बहुत सुंदर कविता है गीता,एक सखी सहेली को मनाती हुई बहुत ही ख़ूबसूरत पंक्तियां

  4. वाह, नाराज़ सखी को मनाती हुई बहुत सुंदर कविता

    1. सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

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