निडर होकर निकले हर लड़की
काश ! ऐसा भी दिन आए,
बेटों से डर ना लगे
हर बेटा पूजा जाए…
कर्म हों सबके अच्छे
संस्कार हों भरे,
शुद्ध हो आचरण बेटों का
ऐसा पाठ पढ़ाया जाए..
भारत की गलियां हों सुंदर
हर बेटी हो बेटों से अव्वल…
कुत्सित मन को तजकर सब
रहें शिक्षित और रहें सलामत
एक ऐसा कानून बने
बेटी पर जो कोई नजर गड़ाये,
दी जाए उसको फिर फाँसी
जो दामन में दाग लगाये…
बेटे हों संयमी, संस्कारी,
चरित्रवान हो हर घर की नारी..
प्रज्ञा’ की है बस एक ही आस,
अब और ना हों ‘निर्भया काण्ड’…..
“अब और ना हों निर्भया काण्ड”
Comments
5 responses to ““अब और ना हों निर्भया काण्ड””
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बहुत ही सुंदर रचना
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धन्यवाद आपका सराहना हेतु
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बहुत सुंदर सोच और बहुत सुन्दर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद दी
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बहुत खूब
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