बिना तुम्हारे

बिना तुम्हारे
इस ठंडक में
बिस्तर से उठने का
मन नहीं है,
आ जाओ ना,
चली आओ, उनके हाथ
उनके साथ,
ताजगी बनकर
नाराजगी तजकर,
अन्यथा उठने में
हैं असहाय,
आ जाओ ना चाय।

Comments

4 responses to “बिना तुम्हारे”

  1. धन्यवाद शब्दों के जादूगर
    सुन्दर लेखनी

  2. Geeta kumari

    हैं असहाय,आ जाओ ना चाय।
    बहुत सुंदर हास्य , काबिले तारीफ़ रचना

  3. विनोदप्रिय हास्यास्पद कविता जो सत्य है

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