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  1. कवि गीता जी की यह कविता यथार्थ से आदर्श की ओर जाती बहुत सुंदर कविता है। कवि का बिम्ब विधान बहुत ही सुन्दर है, कविता में चिंतन और विचारों को सहज सौर सरल तरीक़े से पेश किया गया है। दीन-हीन की दशा का यथार्थ चित्र प्रस्तुत किया गया है। सृजनात्मकता एवं गहन अनुभूति का चरमोत्कर्ष दिखाई दे रहा है।

    1. कविता की इतनी उत्कृष्ट और प्रेरणा देने वाली समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी। आपकी समीक्षा से बहुत उत्साह वर्धन मिलता है सर, बहुत आभार

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