3 Comments

  1. बहुत ख़ूब, कविता चाय की सराहना के साथ साथ किसी और की भी सराहना कर गई और कवि सतीश जी चाय पर ही लिखते रह गए ।
    सर्दियों में चाय की आवश्यकता को बताती हुई बहुत सुन्दर रचना

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