4 Comments

  1. वाह वाह, बहुत खूब, कवि ने अभिधा के साथ लक्ष्यार्थ साधना की है। भाषा मे सुन्दर प्रवाह है, कविता संप्रेषणीय है।

  2. कवि चंद्रा जी ने इतनी ठंड में धूप का आह्वाहन किया है, बहुत ख़ूब।
    अतिश्योक्ति अलंकार का सुन्दर प्रयोग,
    “अरी ओ धूप तुम क्यों डर गई ठंडक से चीर कर आ जाओ
    हमें तपा जाओ,”
    सुन्दर,शिल्प , ख़ूबसूरत कथ्य और सुन्दर लय साथ लिए हुए रोचक कविता

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