यह जो जिंदगी इतना सबक सिखाऐ जा रही हो
मुझे अनुभवों का पुलिंदा बनाऐ जा रही हो
जिंदगी है चार दिन की
क्यों इतनी मगजमारी किऐ जा रही हो ।
जिंदगी
Comments
6 responses to “जिंदगी”
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बहुत खूब, अत्यंत उम्दा पंक्तियाँ
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत खूब
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शुक्रिया जी
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बहुत ख़ूब, लाजवाब अभिव्यक्ति
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धन्यवाद जी
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