6 Comments

  1. बहुत बहुत बहुत हीं सुन्दर प्रस्तुति
    न मिर्च न मशाला पर स्वाद चोखा।
    पढ़के तेरी रचना हँसी को किसने रोका।।
    अतिसुंदर 💯 में 💯

    1. इतनी सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी, 🙏🙏उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार।
      आपका स्नेहाशीष यूं ही बना रहे

  2. छोटे अंगूर ही खट्टे होते हैं,
    मैं तो सत्य ही बोल गया।
    यह सौ नंबर का पर्चा था,
    मुझको दो की भी आस नहीं,
    ———- बहुत खूब, हास्य रस की बहुत सुन्दर रचना है। कवि गीता जी ने संतुलित भाव से हास्य साधना की है। बहुत खूब

    1. कविता की इतनी सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत आभार सर। प्रोत्साहन देने और उत्साह बढ़ाने के लिए,
      आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

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