पुण्य घर पर पड़ा है

वृद्ध माता पिता का सहारा बनो
है जरूरत उन्हें तुम सहारा बनो,
याद कर लो वे बचपन दिन आज तुम,
पाले-पोसे थे कितने सलीके से तुम।
आंच आने न दी जिसने तुम पर कभी,
पूरी करते थे तत्काल चाहत सभी,
आज बूढ़े हुए वे, भुलाओ न तुम,
आँसू पोंछो, न आने दो कोई भी गम।
ईश का रूप हैं वे उन्हें पूज लो,
पुण्य घर पर पड़ा है, उसे लूट लो,
कोई तीरथ नहीं, धाम कोई नहीं
सबसे बढ़कर हैं वे और कोई नहीं।

Comments

4 responses to “पुण्य घर पर पड़ा है”

  1. वाह वाह बहुत बढ़िया लिखा है

  2. वाह उम्दा रचना

  3. Geeta kumari

    याद कर लो वे बचपन दिन आज तुम,
    पाले-पोसे थे कितने सलीके से तुम।
    वृद्ध माता पिता का सहारा बनो
    _________ माता पिता अपने बच्चों को बहुत प्यार से पाल पोस कर बड़ा करते हैं तो उन बच्चों का दायित्व बनता है कि वृद्ध माता पिता का सहारा बनें। इस सुंदर सोच को कविता रूप में प्रस्तुत करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर और प्रेरक रचना।

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