खुद पर रखो पूर्ण विश्वास तुम

पहले खुद पर रखो
पूर्ण विश्वास तुम,
तब जमाने से मांगो
खुला साथ तुम।
हीन भावों को खुद से
करो दूर तुम,
शक की बातें स्वयं से
रखो दूर तुम।
हो गलत यदि कहीं पर
क्षमा मांग लो
दूसरों की कमी को
करो माफ तुम।
दाग अपने स्वयं ही
करो साफ तुम,
अपने अंतस से बाहर
करो नाग तुम।
खुद के व्यवहार को
तोलना है कठिन
खुद की कमियों में
खुद बोलना है कठिन।
तत्वदर्शी है वो जो
समझता है सब,
दूर वो करके कमी
वो निखरता है तब।
दम है विश्वास में
पहले खुद पर रखो,
हार का जीत का
स्वाद सबका चखो।
कह रही लेखनी
खूब उत्साह से
जिन्दगी को जियो
खूब उत्साह से।

Comments

3 responses to “खुद पर रखो पूर्ण विश्वास तुम”

  1. बहुत बढ़िया

  2. Geeta kumari

    “हार का जीत कास्वाद सबका चखो।
    कह रही लेखनी खूब उत्साह से
    जिन्दगी को जियो खूब उत्साह से।”
    *****बहुत ही प्रेरणादायक रचना, नकारात्मकता में भी सकारात्मकता का एहसास कराने वाली बहुत ही सुंदर और उत्साह वर्धक रचना।

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