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  1. एक कविता के अंतर्गत दो कविताओं का कुंडलिया छन्द में अनूठा मिश्रण है।
    कहे लेखनी उड़ो, मगर तुम पंख उगाओ,
    निज मेहनत से तुम, सच्ची मंजिल को पाओ।
    ____ सच्ची मेहनत के बारे में बताती हुई कवि सतीश जी की
    उम्दा रचना।
    “कहती कलम जितनी, चादर है पैर खोलिए,
    छोड़ सभी उलझनें, खुशी के बोल बोलिए”
    _____मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में खुश रहने की सलाह देती हुई बहुत सुंदर रचना, सुंदर भाव और सुंदर शिल्प

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