आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,

आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,
जीवन संवार दो हमरी,,,,
चरणों की रज बनायी के
कर दो कृपा एक आंखरी
आँगन खुन्दी लो सांवरो ,,,,
जीवन संवार दो हमरी,,,,
हम पर विपत्तियों की
जब जब बही है धारा
तेरा ही तो आसरा है
तेरा ही तो है सहारा
इतना करी दो सांवरो
हो पास हम तेरे ही
आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,
जीवन संवार दो हमरी,,,
_____✍

Comments

6 responses to “आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,”

    1. धन्यवाद सर 🙏🙏

  1. Geeta kumari

    बहुत सुन्दर रचना

  2. Suman Kumari

    सुन्दर

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