आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,
जीवन संवार दो हमरी,,,,
चरणों की रज बनायी के
कर दो कृपा एक आंखरी
आँगन खुन्दी लो सांवरो ,,,,
जीवन संवार दो हमरी,,,,
हम पर विपत्तियों की
जब जब बही है धारा
तेरा ही तो आसरा है
तेरा ही तो है सहारा
इतना करी दो सांवरो
हो पास हम तेरे ही
आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,
जीवन संवार दो हमरी,,,
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आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,
Comments
6 responses to “आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,”
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर 🙏🙏
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बहुत खूब
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बहुत खूब
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बहुत सुन्दर रचना
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सुन्दर
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