6 Comments

  1. सुना दो आज मुझको तुम,
    नज़्म कोई मोहब्बत की।
    हो जिसमें बस बात,
    कुछ तेरी कुछ मेरी।
    ——– वाह, बहुत ही सुंदर रचना, व्यस्ततावश देख नहीं पाया था, बहुत ही लाजवाब रचना है।

    1. सुन्दर और उत्साह वर्धक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, हार्दिक आभार

Leave a Reply