5 Comments

  1. बहुत सुंदर रचना 🙏
    बिन पैंदे के लोटे हैं
    आज नहीं कल वो दिन आएंगे
    जब काले चश्मे
    सफेद हो जाएंगे

    1. बिल्कुल सही कहा आपने ऐसा ही होगा कविता पर टिप्पणी करने हेतु धन्यवाद

  2. नेताओं की चाटुकारिता को
    बहुत अच्छे से व्यक्त
    किया है आपने…

    आपकी सराहना के लिए
    मेरे पास शब्द नही हैं
    कवि हो तो आप जैसा
    वाह प्रज्ञा जी !
    क्या शब्द सागर है आपका,
    सुंदर शिल्प तथा हृदय तक
    जाते भाव.
    एक अच्छी कविता के सभी गुण हैं
    पाठक के मन को छूने वाले भाव..

  3. आप समसामयिक सरकार पर
    अच्छा तंज कस रही हैं
    कला पक्ष और भाव पक्ष
    मजबूत है और राजनीति पर
    अच्छा तंज कसा है आपने वाह

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