जो राह सच्ची चलेगा मित्रों
भले ही गाली वो लाख खाये
मगर है ईश्वर का न्याय ऐसा,
हमेशा सच ही सैल्यूट पाये।
कभी भी जीवन में तुम किसी का
बुरा न करना, बढ़े ही जाना,
कभी भी मेहनत से मत भटकना
चले ही जाना कदम बढ़ाना।
अनेक छींटाकशी भी होगी
अनेक कमियां दिखाई देंगी,
मगर तुझे हिम्मत रख हमेशा
स्वयं की राहें बनानी होंगी।
बना के सीढ़ी, पहुंच के मंजिल
खुशी तुझे भी मनानी होंगी।
हमेशा सच ही सैल्यूट पाये
Comments
6 responses to “हमेशा सच ही सैल्यूट पाये”
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बहुत ही लाजवाब व सटीक रचना की है आपने।
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बना के सीढ़ी, पहुंच के मंजिल
खुशी तुझे भी मनानी होंगी।
_______सच्ची राह पर चलते हुए अपनी कामयाबी की सीढ़ी स्वयं बनाने की उच्च स्तरीय प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना। सुन्दर शिल्प और उत्कृष्ट लेखन -

बहुत खूबसूरत रचना
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वाह, लाजवाब रचना
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सुंदर
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जो राह सच्ची चलेगा मित्रों
भले ही गाली वो लाख खाये
मगर है ईश्वर का न्याय ऐसा,
हमेशा सच ही सैल्यूट पाये।
कभी भी जीवन में तुम किसी का
बुरा न करना, बढ़े ही जाना,
कभी भी मेहनत से मत भटकनासत्य की विजय ही होती है यही कहती रचना
अति उत्म
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