जीवन में सद्कर्म कर सकूँ(हरिगीतिका छन्द)

जीवन में सद्कर्म कर सकूँ, यह शक्ति तू दे मुझे,
झूठ को नित करूँ उजागर, यह शक्ति तू दे मुझे।
गा सकूँ खुले मन से गाने, उल्लास भाव अपना,
हे ईश! मुझे वर देना तुम, देखूँ सच का सपना।
रात को रात दिन को दिन कह, लिख पाऊं सच्चाई,
कुछ करूं न कर पाऊँ बातें, करूं जरा अच्छाई,
निरुत्साहितों को दे पाऊँ, गर उत्साह जरा सा,
तब मेरा जीवन मुझे लगे, सफल व भरा भरा सा।

Comments

6 responses to “जीवन में सद्कर्म कर सकूँ(हरिगीतिका छन्द)”

  1. बहुत सुंदर छंदबद्ध कविता

  2. बहुत ही बढ़िया रचना है

  3. बहुत सुंदर रचना

  4. Geeta kumari

    निरुत्साहितों को दे पाऊँ, गर उत्साह जरा सा,
    तब मेरा जीवन मुझे लगे, सफल व भरा भरा सा
    _____________कवि सतीश जी की बहुत सुंदर छंद बद्ध रचना निरुत्साहितों को उत्साह देने का सुंदर विचार प्रस्तुत करते हुए उम्दा लेखन

  5. बहुत सुन्दर कविता

  6. जीवन में सद्कर्म कर सकूँ, यह शक्ति तू दे मुझे,
    झूठ को नित करूँ उजागर, यह शक्ति तू दे मुझे।
    गा सकूँ खुले मन से गाने, उल्लास भाव अपना,
    हे ईश! मुझे वर देना तुम, देखूँ सच का सपना।

    सद्कर्म करने और जीवनपथ पर अग्रसर करने को प्रेरित करती पंक्तियां

Leave a Reply

New Report

Close