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  1. चल गुजिया ही खिला दे
    मीठी सी बोली सुना दे
    समझेंगे खेल ली होली,
    पोत दे लालिमा रोली।
    _________ होली के त्यौहार पर गुजिया खाने की स्नेहिल सी मनुहार करती हुई कवि सतीश जी की बहुत खूबसूरत कविता बेहतर शिल्प, अतीव सुंदर भावाभिव्यक्ति

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