रानी लक्ष्मीबाई ने भारत से किया
प्राणों से बढ़कर प्रेम
देश की खातिर कर दिया
प्राणों का भी होम
प्राणों का भी होम
करके यह देश बचाया
अंग्रेजों के आगे कभी ना
सिर को झुकाया
हंसते-हंसते हवन कर दिया
अपना वीर-शरीर
ओ कुत्सित ! ओ आलसी !
लक्ष्मीबाई से कुछ सीख..
“लक्ष्मीबाई से कुछ सीख”
Comments
2 responses to ““लक्ष्मीबाई से कुछ सीख””
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जय हो
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ओ कुत्सित ! ओ आलसी !
लक्ष्मीबाई से कुछ सीख..
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