तभी सार्थक है लिखना

मेरे लिखे से उजाला हो जाये
कुछ भी नहीं तो
उठें चिंगारिया,
किसी को जिन्दगी का
रास्ता मिल जाये।
अंधेरे में भटकता
अगर मन हो किसी का
मेरी दो पंक्ति उसको
रास्ता दे आये।
तभी सार्थक है लिखना
किसी काम आये,
मेरी पहचान छोड़ो
जमाना लाभ पाये।
देख अदना सा कवि हूँ
मगर संदेश मेरा,
अडिग रह राह अपनी,
न बन चिंता का डेरा।
साथ लाये नहीं कुछ
साथ जाये नहीं कुछ
बताकर सब गए हैं
पुराने कवि यही सच।
किसी को ठेस देने
कलम मेरी उठे मत
शुद्ध साहित्य सेवा
रहे केवल मेरा पथ।

Comments

7 responses to “तभी सार्थक है लिखना”

  1. Deepa Sharma

    बहुत सुंदर कविता

  2. बहुत खूब, वाह

  3. Geeta kumari

    मेरे लिखे से उजाला हो जाये
    कुछ भी नहीं तो
    उठें चिंगारिया,
    किसी को जिन्दगी का
    रास्ता मिल जाये।
    ______’________एक सच्चे कवि हृदय की सच्ची भावनाओं को
    व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की अत्यंत श्रेष्ठ रचना…उत्तम शिल्प उम्दा लेखन

  4. मेरे लिखे से उजाला हो जाये
    कुछ भी नहीं तो
    उठें चिंगारिया,
    किसी को जिन्दगी का
    रास्ता मिल जाये।
    अंधेरे में भटकता
    अगर मन हो किसी का
    मेरी दो पंक्ति उसको
    रास्ता दे आये।

    आपकी लेखनी से वाकई में मन को प्रकाश और राहगीर को रास्ता मिलता है

  5. वाह वाह अति सुंदर

  6. वाह बहुत खूब

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