हम रचयिता हैं, हम कालिदास हैं…

यह साहित्य महज
चंद लेखनियों का गुलाम नहीं
हम जैसे कितने आएगे और कितने जाएगे
हर कवि जोड़ेगा एक पन्ना और
अनगिनत पाठक पढ़ते जाएगे
कुछ ऐसा लिखेंगे हम और
कुछ ऐसा कर जाएगे
जो साथ अधूरा ही छोंड़ गये
ऐसे इतिहास को मिटाते जाएगे
जोड़ेगे कुछ अध्याय हम
जीवन के इतिहास में
कुछ फेर बदल भी करते जाएगे
हम रचयिता हैं, हम कालिदास हैं
आने वाली पीढ़ी को कुछ बेहतर दे जाएगे…

Comments

15 responses to “हम रचयिता हैं, हम कालिदास हैं…”

  1. Geeta kumari

    हर कवि जोड़ेगा एक पन्ना और
    अनगिनत पाठक पढ़ते जाएगे
    कुछ ऐसा लिखेंगे हम और
    कुछ ऐसा कर जाएगे
    _________ बहुत खूब ,साहित्य पर कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना ,भाव और शिल्प अति उत्तम

    1. सुंदर आलोचना

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  4. काव्य को लेकर सुंदर व्याख्या की है कवि प्रज्ञा जी

  5. अति उत्तम श्रेष्ठ रचना

  6. सत्य कहा आपने

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