पाकिस्तान दूसरों की बरबादी चाहते
खुद बरबाद हो गया
उसके राह पर चलने वाले का
यही अंजाम होता है
अच्छाई फैला कर अमर हो गया जो
अदृश्य रहकर भी भलाई का पैगाम देता है
देश की रक्षा करने वाले से सबक सीख ले
जो अपनों की खातिर हंसकर जान देता है
उन काकरोचों को मारना मकसद है अब
देश के नुक़सान में जो श्रमदान देता है
देश के नुक़सान में जो श्रमदान देता है
Comments
7 responses to “देश के नुक़सान में जो श्रमदान देता है”
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धन्यवाद सभी कविता पिपासुओं को
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देश की रक्षा करने वाले से सबक सीख ले
जो अपनों की खातिर हंसकर जान देता है….
उन काकरोचों को मारना मकसद है अब
देश के नुक़सान में जो श्रमदान देता है
___________ देश के गद्दारों से सावधान करती हुई और देशभक्ति पर लिखी गई कवि राजीव रंजन जी की बहुत सुंदर प्रस्तुति, देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत बहुत सुंदर लेखन -
इतिहास गवाह है कि दूसरों की बर्बादी चाहने वाले खुद ही बर्बादी के कगार पर पहुंच जाते हैं अति उत्तम प्रस्तुतीकरण
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सुंदर रचना
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अतिसुंदर
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बहुत खूब
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