सद न छोड़ कहती है

विचार ही तो हैं जो
व्यक्तित्व लिखते हैं मेरा,
सदविचार उत्साहित कर
बाग सींचते हैं मेरा।
सकारात्मकता मुझे
आशान्वित कर,
चाह को मेरी
पुष्पित कर पल्वित कर,
एक लय देती है,
प्रेममय करती है।
मगर कभी कभी
नकारात्मकता
तपन दे कर
मुरझा सी देती है,
राही की राह
अवरुद्ध करती है।
ऐसे समय में
हिम्मत से काम लेकर
छोड़ कर वो तम की राह
सद की तरफ बढ़ना
जरूरी हो जाता है,
नीति यही कहती है,
सद न छोड़ कहती है।

Comments

6 responses to “सद न छोड़ कहती है”

  1. बहुत ही सुंदर रचना

  2. Geeta kumari

    विचार ही तो हैं जो
    व्यक्तित्व लिखते हैं मेरा,
    सदविचार उत्साहित कर
    बाग सींचते हैं मेरा।
    ___________ कवि सतीश जी की एक दम सच्ची प्रस्तुति, कोई भी व्यक्ति अपनी रचना में अपने विचार ही तो लिखता है.. बहुत सुंदर शिल्प , भाव और सुन्दर लय के साथ शानदार रचना।

  3. अति उत्तम रचना

  4. अतिसुंदर रचना

  5. Deepa Sharma

    कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत सुन्दर कविता

  6. कवि की कविता लिखने की भावनाओं को उजागर करती रचना

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