8 Comments

  1. मेरे वाचन में हो सच्चाई
    व्यक्तित्व में हो अच्छाई

    हे देव ! मुझे ऐसा वर दो
    मुझको मानवता दे दिखलाई

    ना कभी किसी का दिल तोड़ूं
    किसी पर आई आंच को सिर ले लूं..

    आपकी यह कविता पढ़कर आपकी हृदय की गहराई का पता चलता है
    जिसमें सबके लिए स्नेह भरा है
    सुंदर वरदान मागती कवि प्रज्ञा जी रचना

  2. मेरे वाचन में हो सच्चाई
    व्यक्तित्व में हो अच्छाई
    _______ कवि,,,प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना ,सुंदर अभिव्यक्ति

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