सदा मस्तक रहे ऊँचा

उठो जागो उठो जागो
करो इस मुल्क को रोशन
जगा लो देश का यौवन,
लगा दो आज निज तन मन।
सदा मस्तक रहे ऊंचा,
नहीं हो देखना नीचा,
हमारा देश यह भारत,
रहे ऊंचा सदा ऊंचा।
अहित कुछ भी न कर पायें
हमारा देश के दुश्मन
उठा लें अब खड़क को हम
मसल दें दुश्मनों को हम।
करें प्रयास सारे मिल,
बुराई दूर कर दें सब,
हर तरफ हो सुहाना कल,
सुहाना कल सुहाने पल।

Comments

7 responses to “सदा मस्तक रहे ऊँचा”

  1. वाह सर, बहुत सुंदर काव्य सौंदर्य है। ” मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन” वाचिक भार युक्त ‘विजात छन्द’ की अद्भुत रचना है सर। आपकी लेखनी कमाल है।

  2. सुन्दर रचना

  3. वाह वाह बहुत सुंदर भाव

  4. Deepa Sharma

    देशभक्ति पर कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत सुन्दर कविता

  5. Geeta kumari

    उठा लें अब खड़क को हम
    मसल दें दुश्मनों को हम।
    करें प्रयास सारे मिल,
    बुराई दूर कर दें सब,
    हर तरफ हो सुहाना कल,
    सुहाना कल सुहाने पल।
    _____________ देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत और वीर रस से सुसज्जित कवि सतीश जी की बेहद शानदार रचना । कमाल का लेखन “विजात छंद” में एक अनुपम रचना, वाह!

  6. Arvind Kumar

    देशभक्ति पर कवि पाण्डेय जी की बहुत सुंदर कविता, जय हिंद

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