10 Comments

  1. कॅंटक या अवरोध कोई
    तब पीछे नहीं हटूॅं मैं,
    उसका विरोध करने को कभी।
    — यूँ तो पूरी कविता बहुत सुंदर है। लेकिन कविता के भीतर ये पंक्तियां बहुत ही लाजवाब हैं। लेखनी की यह निरंतरता बनी रहे।

    1. उत्साह प्रदान करने वाली समीक्षा हेतु, आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी… आपकी समीक्षा से बहुत मनोबल मिलता है सर

    1. आपके द्वारा किए गए उत्साहवर्धन से लिखने की बहुत उर्जा मिलती है कमला जी, हार्दिक धन्यवाद

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