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  1. कर्म करके भरता हूँ पेट
    मुफ्त की मैं ना खाऊं
    हूँ मजदूर इसी कारण
    मैं मजबूर कहाऊं…
    _________ मजदूर वर्ग पर लिखी हुई कवि प्रज्ञा जी की एक बेहतरीन रचना

  2. नही हाथ में उंगलियां
    पर पेट में हैं दात
    जितना कमाती है किस्मत
    उतना खाती आंत
    उतना खाती आंत
    करूं क्या मुझे बताओ
    मेरी हालत पर
    तुम ना हमदर्दी दिखाओ
    काम कराओ
    फिर मुझको दो
    हक का दाना।।

    उच्चकोटि की रचना लिखी है आपने मजदूरों की व्यथा का ह्रदयस्पर्शी वर्णन

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