उधार की जिंदगी

तुझसे है नाता
विश्वास न आता
इक पास आता
दूजा दूर जाता
दूर रहकर भी
कहां चैन आता
शादी लड्डु जैसे
खाकर है पछताता
अब ताकता राह
नये पंछियों की
जो देख सुनकर
भी न सीख पाता
परानी राहों पर
पैर को जमाता
उधार की जिंदगी
उधार में गंवाता
कहां सीखता कोई
सब सिखा जाता
भ्रम‌ भरी दुनियां
किसे सीखना आता

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Responses

  1. कहां सीखता कोई
    सब सिखा जाता
    भ्रम‌ भरी दुनियां
    किसे सीखना आता
    _________ अनुभव सब कुछ सिखा देता है यही सुंदर संदेश दिया है कवि राजीव रंजन जी ने अपने इस कविता में, बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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