3 Comments

  1. भूख अलग से रोग अलग से
    घूम घूम मुश्किल आई है,
    लौट किस तरह जाऊँ फिर अब
    मन की आशा मुरझाई है।
    ________________ कोरोना महामारी के चलते दोबारा लॉकडाउन जैसी स्थिति आ गई है। ऐसी स्थिति में कवि की दृष्टि श्रमिक वर्ग की ओर उठी, श्रमिकों की स्थिति का मार्मिक एवम् यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बेहद संजीदा रचना।अति उत्तम लेखन

  2. बहुत सही लिखा सर

    बहुत से अनछुए पहलू हैं जो
    लोकडाउन के कारण
    अंधेरों में तड़प रहे हैं
    फ्री सहायता लेने
    में भी संकोच करते हैं
    बहुत विकट परिस्थिति है

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