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  1. मानव जाति पर यह
    अदृश्य खंजर
    कब तक चुभेगा।
    अस्त-व्यस्त है जिन्दगी
    _____________ कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित जनजीवन पर कवि की ठहरी है नजर, अदृश्य जीवो का यह खंजर कब तक मनुष्य के जीवन पर चलता रहेगा….. समसामयिक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करते हुए कवि सतीश जी की एक सच्ची प्रस्तुति। उम्दा लेखन

  2. संतापों क्रम यह
    कब बदलेगा,
    मानव जाति पर आया
    संकट कब निपटेगा।
    हा हा कार, चीत्कार
    विभत्स करुण क्रंदन
    कब रुकेगा,

    बहुत सुंदर रचना 🙏

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