16 Comments

  1. अन्न एवम् जल प्रदान करने वाली,
    वसुन्धरा को नमन्।
    पृथ्वी के संरक्षण हेतु,
    आओ उठाऍं कुछ कदम।
    —— कवि गीता जी की बहुत उच्चस्तरीय रचना। भाव और शिल्प दोनों का अदभुत समन्वय। बहुत बेहतरीन रचना।

  2. आओ पृथ्वी दिवस मनाऍं,
    पृथ्वी को हरा-भरा बनाऍं।
    ________ पृथ्वी दिवस पर बहुत लाजवाब कविता, बहुत सुन्दर

  3. पृथ्वी पर पवन हो रही अशुद्ध,
    आओ वृक्ष लगाऍं हम।…… पृथ्वी दिवस पर बहुत लाजवाब कविता ,बहुत सुंदर

  4. पृथ्वी दिवस पर बहुत ही सुंदर और उत्कृष्ट प्रस्तुति, बहुत लाजवाब और उच्च कोटि की कविता

  5. सही बात है प्रकृति ने ये पृथ्वी बहुत ही सुंदर बनाई थी,अब हमे इसका ध्यान रखना होगा। बहुत ही सुंदर कविता लिखी है बेटा, ऐसे ही लिखते रहो और आगे बढ़ते रहो ,आशीर्वाद

  6. अनुप्रास अलंकार से युक्त बहुत सुंदर पंक्तियां,
    पृथ्वी पर पवन हो रही अशुद्ध,
    आओ वृक्ष लगाऍं हम।
    इस धरा को और भी,
    हरा बनाऍं हम।******** पृथ्वी दिवस पर गीता जी द्वारा रचित बहुत ही उत्तम रचना, वाह ! उच्च स्तरीय लेखन

  7. ये सच है कि धरती माता हमें अन्न और जल देती है,धरती मां को नमन किया है गीता जी आपने अपनी इस कविता में,बहुत सुंदर भाव और बहुत सुंदर कविता।

  8. पृथ्वी दिवस पर बहुत शानदार कविता लिखी है गीता दीदी आपने,बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

  9. पृथ्वी दिवस पर बहुत सुंदर कविता । हमें पृथ्वी को प्रदूषण से बचाने के लिए निश्चित रूप से अपनी जीवनशैली में सुधार करना ही होगा, वृक्षारोपण का बहुत सुंदर संदेश दिया है आपने अपनी इस कविता में गीता जी, बहुत लाजवाब कविता।

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