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  1. सहम-सहम कर जी रहे, हवाओं में फैलीं ज़हर है
    करनी हमारी, कैसे कहें कुदरत का कहर है
    __________ समसामयिक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करते हुए कवि सुमन, जी की उम्दा रचना

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