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  1. कहीं उड़गन का है कलरव।
    निभाती पृथ्वी दायित्व पूरे
    एक माता का,
    करें महसूस हम भी
    पूत बनकर दर्द माता का।
    ___________ पृथ्वी को हम माँ के रूप में ही मानते हैं, पृथ्वी का माता के रूप में मानवीकरण किया है कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना में । पृथ्वी दिवस पर एक श्रेष्ठ रचना की सृष्टि हुई है कवि की लेखनी से। पृथ्वी और मानव के मध्य माता और पुत्र का पवित्र संबंध स्थापित किया गया है, भाषा और शिल्प का अत्यंत सुन्दर समन्वय स्थापित करते हुए उच्च स्तरीय लेखन

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