5 Comments

  1. उसे देखने को आतुर हों सबकी अखियाँ।
    आलस छोड़ ऐसी भोर के हों दर्शन,
    कविता ऐसी कहो कलम॥
    ——- बहुत सुंदर, अति उत्तम रचना। बहुत खूब

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